LAW'S VERDICT

बिना परमिट ट्रक से हुआ एक्सीडेंट तो मुआवजा देंगे मालिक और ड्राइवर

इंदौर हाईकोर्ट से इंश्योरेंस कंपनी को मिली राहत, ‘Pay and Recover’ का आदेश

इंदौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवज़ा मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि वाहन अनुमोदित राज्य/क्षेत्र से बाहर बिना वैध परमिट के चलाया जा रहा हो, तो इंश्योरेंस कंपनी पर अंतिम रूप से मुआवज़ा देने की जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती। हालांकि, जस्टिस पवन कुमार द्विवेदी ने ट्रक हादसे में घायल पीड़ित को राहत देते हुए “पे एंड रिकवर” (Pay and Recover) के सिद्धांत को लागू  कर कहा है कि बीमा कंपनी पहले पीड़ित को मुआवजे का भुगतान तो करेगी, लेकिन बाद में उसकी वसूली ट्रक के ड्राइवर और मालिक से करेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि हादसा जिस ट्रक से हुआ वो बिना परमिट के मध्य प्रदेश में चल रहा था।

2012 की अपील, गैरहाज़िर रहे ड्राइवर और मालिक

यह अपील वर्ष 2012 की थी, जिसे ओरिएण्टल बीमा कंपनी ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 173 के तहत दायर किया था। वाहन चालक संत कुमार चौधरी (अलवर) और वाहन मालिक रामावतार (अलवर) को नोटिस की विधिवत तामील के बावजूद वे न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। चालक को सामान्य प्रक्रिया से और मालिक को अलवर संस्करण के एक अखबार में प्रकाशन के माध्यम से नोटिस दिया गया था।

हादसा एमपी में, परमिट था अन्य राज्यों का

मामला 16 फरवरी 2008 की दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें ट्रक जमालपुर चौराहा, नीमच (मध्यप्रदेश) में पलट गया। घायल क्लीनर निर्मल शर्मा को हाथ और जबड़े में गंभीर चोटें आईं। बीमा कंपनी के वकील प्रदीप गुप्ता, भास्कर अग्रवाल और भारत यादव ने दलील दी कि वाहन का परमिट केवल हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक सीमित था, जबकि दुर्घटना मध्यप्रदेश में हुई, जो परमिट क्षेत्र से बाहर है।

ट्रिब्यूनल का फैसला पलटा, इंश्योरेंस की जिम्मेदारी खत्म

अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 के तहत हादसे के लिए जिम्मेदार वाहन का वैध परमिट का होना अनिवार्य है। बिना परमिट वाहन चलाना पॉलिसी शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है। ऐसे में इंश्योरेंस कंपनी को अंतिम रूप से मुआवज़ा देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

पीड़ित के हित में ‘Pay and Recover’ लागू

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि बीमा कंपनी पहले पीड़ित को ₹1.41 लाख की पूरी राशि का भुगतान करेगी और बाद में यह रकम वाहन मालिक व चालक से वसूल कर सकेगी।

फैसले का कानूनी महत्व

यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल है, जहां वाहन परमिट शर्तों का उल्लंघन करते हुए दुर्घटना में शामिल होता है। कोर्ट ने साफ किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और यातायात नियमों से जुड़ी शर्तों का पालन अनिवार्य है।

MA-13-2012

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